ए कैसी है ज़िंदगी
एपिसोड 1 ( काली बरसात की रात )
रात और सुबह के बीच का वह समय था… जब दुनिया का ज़्यादातर हिस्सा गहरी नींद में डूबा होता है और प्रकृति खुद भी जैसे कुछ पल के लिए ठहर जाती है।
घड़ी की सुइयाँ सुबह के ठीक चार बजे पर आकर टिक गई थीं।
आसमान पूरी तरह काले बादलों से ढका हुआ था। ऐसा लगता था मानो किसी ने चाँद और तारों को मोटे काले पर्दे के पीछे कैद कर दिया हो। दूर-दूर तक रोशनी का नामोनिशान नहीं था।
अचानक...
धड़ाम...!
बिजली की एक लंबी, चीर देने वाली चमक ने पूरे आसमान को दो हिस्सों में बाँट दिया।
उसके अगले ही पल बादलों की भयंकर गर्जना ने जंगल, पहाड़ियों और सुनसान सड़क को हिला दिया।
बारिश अब सिर्फ बरस नहीं रही थी, मानो आसमान अपना वर्षों का जमा हुआ दर्द धरती पर उड़ेल रहा हो।
हर बूंद सड़क पर गिरकर एक अलग आवाज़ पैदा कर रही थी।
डामर की काली सड़क पर पानी की पतली परत शीशे की तरह चमक रही थी। सड़क के दोनों ओर फैला घना जंगल हवा के हर झोंके के साथ बेचैनी से झूम रहा था। लंबे पेड़ों की शाखाएँ एक-दूसरे से टकराकर ऐसी आवाज़ निकाल रही थीं जैसे कोई अंधेरे में धीमी फुसफुसाहट कर रहा हो।
भीगी हुई मिट्टी की सोंधी खुशबू हवा में घुल चुकी थी।
ठंडी हवा शरीर को नहीं, सीधे हड्डियों तक महसूस हो रही थी।
जंगल के भीतर कहीं कोई उल्लू बोलता, फिर अचानक सब कुछ शांत हो जाता।
उस सन्नाटे में सिर्फ बारिश की अनगिनत बूंदें थीं...
और प्रकृति का बेचैन संगीत।
सड़क पर कई किलोमीटर तक कोई वाहन नहीं था।
कोई इंसान नहीं...
कोई आवाज़ नहीं...
सिर्फ बारिश...
और अंधेरा।
तभी...
जंगल के भीतर झाड़ियों में अचानक तेज़ हलचल हुई।
पहले एक सूखी डाल टूटी।
फिर दूसरी।
फिर किसी के तेज़ कदमों की आवाज़ बारिश के शोर को चीरती हुई सुनाई देने लगी।
ऐसा लग रहा था जैसे कोई पूरी ताकत से भाग रहा हो।
लेकिन...
भाग किससे रहा था ?
यह सवाल अभी सिर्फ उस जंगल को पता था।
कुछ ही क्षण बाद घनी झाड़ियों के बीच से एक आकृति लड़खड़ाती हुई बाहर निकली।
वह एक लड़की थी।
उसकी उम्र मुश्किल से बाईस-तेईस वर्ष होगी।
बारिश ने उसके पूरे शरीर को इस तरह भिगो दिया था कि कपड़ों का असली रंग पहचानना भी कठिन हो गया था। उसके लंबे बाल चेहरे से चिपके हुए थे। कई लटें आँखों के सामने आ-आकर उसकी नज़र रोक रही थीं।
वह लड़की मामूली सी लहंगा चोली में थी देखने से लग रही थी कि कोई गरीब तो नहीं लग रही थी और न ही अमीर लग रही थी पर फटे कपड़ो के बीच में चमकता हुआ हिरा जो गले में थी जो बता रही थी,
यह लड़की कोई मिलेनियर फैमिली से है।
वह बार-बार उन्हें हटाने की कोशिश करती, लेकिन अगले ही पल हवा उन्हें फिर चेहरे पर बिखेर देती।
उसकी साँसें बेकाबू थीं।
ऐसा लग रहा था कि वह बहुत देर से लगातार भाग रही है।
उसके हाथ काँप रहे थे।
होठ ठंड से नीले पड़ चुके थे।
बारिश का पानी उसके चेहरे पर बह रहा था... जब बिजली चमकती तो दिखाई देता की उसके पुरे कपडे फटे हुए थे उसके हाथों की कलाइयों और पैरों पर काले निशान बने हुए थे देखने से लग रहा था जैसे किसी ने बांध रखा था उसके गालों और मुंह में भी निशान नजर आ रहा था शायद मुंह भी बांध रखे थे शरीर पर बहुत जगहों पर चोंट के निशान थे जांघों से भी खुन बह कर सुख गया था
या शायद...
आँसू भी उसी में कहीं खो चुके थे।
वह एक पल के लिए सड़क के किनारे रुक गई।
उसने पीछे मुड़कर जंगल की ओर देखा।
घने अंधेरे के अलावा वहाँ कुछ दिखाई नहीं दे रहा था।
लेकिन उसके चेहरे का डर बता रहा था कि उसे कुछ ऐसा दिखाई दे रहा है जिसे बाकी दुनिया नहीं देख सकती।
उसकी आँखों में सिर्फ डर नहीं था...
वहाँ एक गहरा सदमा था।
जैसे कुछ ऐसा हो चुका हो जिसने उसकी पूरी ज़िंदगी बदल दी हो।
हवा का एक तेज़ झोंका आया।
उसके काँपते हाथ अपने आप सीने पर आ गए।
वह खुद को संभालना चाहती थी।
लेकिन उसके पैरों में अब पहले जैसी ताकत नहीं बची थी।
उसने एक कदम आगे बढ़ाया।
फिर दूसरा।
तभी...
बारिश के पानी के बीच सड़क पर लाल रंग की एक पतली धारा बहती हुई दिखाई दी।
वह पानी नहीं था।
वह खून था।
खून...
जो उसके पैरों के बीच से निकलकर बारिश में मिल रहा था।
लेकिन उसके चेहरे पर दर्द से ज़्यादा डर लिखा हुआ था।
जैसे उसे अपने घावों से ज़्यादा उस चीज़ का भय हो...
जो अभी भी शायद उसका पीछा कर रही थी।
उसने एक बार फिर पीछे देखा।
घना जंगल बिल्कुल शांत था।
इतना शांत...
कि वही शांति सबसे ज़्यादा डरावनी लग रही थी।
अचानक दूर कहीं से किसी वाहन के इंजन की बहुत हल्की आवाज़ सुनाई दी।
उसने तुरंत सिर उठाया।
बारिश की मोटी परत के बीच सड़क के बहुत दूर दो धुँधली पीली रोशनियाँ दिखाई दीं।
किसी गाड़ी की हेडलाइट...
उसकी आँखों में पहली बार उम्मीद की एक हल्की चमक उभरी।
लेकिन उसी क्षण...
जंगल के भीतर फिर किसी भारी चीज़ के हिलने की आवाज़ आई।
लड़की का चेहरा एकदम सफेद पड़ गया।
उसने बिना एक पल गंवाए सड़क की ओर दौड़ लगा दी...
पर अब पैरों में दम नहीं आ रही थी दोनों पैर लड़खड़ा रहे थे।
दोनों पैरों के बीच और पेट में अथाह दर्द हो रही थी
तभी ख्याल आया कि किसी को फोन करना है तो देखा कि मोबाइल भी तो गायब है इतना सोच कर तो लड़की के सांसें ही रुकने लगी और वह वहीं बेहोश हो गई ।
कुछ समय बाद एक BMW वही रोड़ पर आ रही थी लड़की को देखकर ड्राइवर ने गाड़ी रोका, उस गाड़ी में पार्टी से लौटते हुए चार दोस्त शराब के नशे में चूर था।
अकेली लड़की को देखकर चारों ने वही फिर शराब की एक एक पैग बनाकर चेयर्स किया और एक दूसरे देखकर मुस्कुराने लगे........
1 अब आगे क्या करेंगे चारों दोस्त
2 उस लड़की के साथ क्या हुआ उस रात
3 कौन थी वह लड़की मामूली कपड़े में हिरे जड़ित लाकेट पहने थी
4 उस मोबाइल में ऐसा क्या था जो उस लड़की को कमजोर बना दिया
इन सवालों के जवाब अगले एपिसोड में

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